Rajasthani Muhavare in Hindi

Rajasthani Muhavare / Kahawat in Hindi:
 अंधा की माखी राम उड़ावै। हिंदी - बेसहारे व्यक्ति का साथ भगवान देता है|
अंधाधुंध की साहबी, घटाटोप को राज।
अंबर कै थेगलीं कोनी लागै।
अकल बिना ऊंट उभाणा फिरैं । हिन्दी – मूर्ख व्यक्ति साधन होते हुए भी उनका उपयोग नहीँ कर पाते।
अक्कल उधारी कोनी मिलै। हिंदी - अकल उधार में प्राप्त नहीं होती |
अक्कल कोई कै बाप की कोनी। हिंदी - अकल पर किसी का सर्वाधिकार नहीं है |
अक्कल बड़ी के भैंस।
अक्कल में खुदा पिछाणो।
अक्खा रोहण बायरी, राखी सरबन न होय । पो ही मूल न होय तो, म्ही दूलन्ती जोय ।।
अगम् बुद्धी बाणियो पिच्छम् बुद्धी जाट । तुर्त बुद्धी तुरकड़ो, बामण सपनपाट ।
। हिंदी - बनिया घटना के आगे की सोचता है, जाट बाद में सोचता है, मुसलमान तुरंत निर्णय लेता है, परन्तु ब्राह्मण तो कुछ सोचता ही नहीं है |
अगस्त ऊगा, मेह पूगा । हिंदी -अगस्त माह शुरू होते ही वर्षा पहुँच जाती है |
अग्रे अग्रे ब्राह्मणा, नदी नाला बरजन्ते । हिंदी – ब्राह्मण सभी कामोँ मेँ आगे रहता है परन्तु खतरोँ के समय पीछे ही रहता है।
अछूकाळ कादा में पीवै ।
अजमेर को घालणिया नै चेरासाई त्यार है।
अटक्यो बोरो उधार दे ।
अठे किसा काचर खाय है |
अठे गुड़ गीलो कोनी अथवा इसो गुड़ गीलो कोनी।
अठे चाय जैंकी उठे बी चाय।
अठे ही रेवड़ को रिवाड़ो, अठे ही भेड्या री घुरी।
अणदेखी न नै दोख, बीनै गति न मोख | हिन्दी – निर्दोष पर दोष लगाने वाले की कहीँ गति नहीँ होती।
अणमांग्या मोती मिलै, मांगी मिलै न भीख। हिंदी -बिना मांगे कीमती चीज मिल जाती है पर मांगने पर भीख भी नहीं मिलती है |
अणमिले का सै जती हैं।
अणसमझ को कुछ नहीं, समझदार की मौत।
अणी चूकी धार मारी।
अत पितवालो आदमी, सोए निद्रा घोर। अण पढ़िया आतम कही, मेघ आवै अति घोर |हिन्दी - अधिक पित्त प्रकृति का व्यक्ति यदि दिन मेँ भी अधिक सोए तो यह भारी वर्षा का सूचक है।
अदपढ़ी विद्या धुवै चिन्त्या धुवे सरीर | हिंदी -अधूरे ज्ञान से चिंता बढती है और शरीर कमजोर होता है |
अनहोणी होणी नहीं, होणी होय सो होय | हिंदी -जो नहीं होना है वह होगा नहीं और होने को टाल नहीं सकते है |
अनिर्यूं नाचै, अनिर्यूं कूदै, अनिर्यूं तोड़ै तान।
अब तो बीरा तन्नै कैगो जिकोई मन्ने कैगो। हिंदी -जिसने तुझे बताया उसी ने मुझे बताया|
अबे तबे का एक रूपैया, अठे कठे का आना बार।

अमरो तो मैं मरतो देख्यो, भाजत देख्यो सूरो । चोधर तो मैं खुसती देखी, लाछ बुहारी कूडो ।। आगै हूँ पाछो भलो, नांव भलो लैटूरो ।।। (देखें - नाम में क्या रखा है)
अम्बर कै थेगळी कोनी लागै । हिंदी -आकाश में पैच नहीं लगाया जा सकता |
अम्बर राच्यो, मेह माच्यो | हिन्दी – आसमान का लाल होना वर्षा का सूचक है।
अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै । हिन्दी– आकाश का तारा हाथ से नहीँ टूटता।
अम्मर पीळो में सीळो । हिन्दी – आसमान का पीला होना वर्षा का सूचक है।
अय्याँ ही रांडा रोळा करसी अर अय्याँ ही पावणा जिमबो करसी ।
अय्यां ही रांड रोला करसी अर अय्यां ही पावणां जीमबो करसी।
अरजन जसा ही फरजन । हिंदी - सब एक जैसे हैं |
अरड़ावतां ऊँट लदै । हिंदी – दीन पुकार पर भी ध्यान न देना।
अल्ला अल्ला खैर सल्ला ।
असलेखा बूठां, बैदां घरे बधावणा । हिंदी - असलेखा नक्षत्र में वर्षा हो तो बैद-हकीमों के घर बधाई बँटे, मतलब रोग बढ़ते हैं ।
असवार तो को थी ना पण ठाडां करदी - हिंदी - किस्सा यों है कि एक औरत को एक डाकू जबरदस्ती उठा कर ले जा रहा था. ऊँट तेजी से दोड़ रहा था. रास्ते में उस औरत का एक परिचित मिल गया. उसने पूछा, 'आरी तू ऐसी सवार कब से हो गयी जो ऊँट को इतने जोरों से भगा रही है ?' तब उसने उत्तर में ऊपर की कहावत कही जिसका अर्थ है कि मैं सवार तो नही थी, जबर्दस्तों ने मुझे सवार बना दिया ।
असाई म्हे असाई म्हारा सगा, असी रातां का अस्सा ही तड़का।
असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा ।
असी रातां का अस्सा ही तड़का ।
असो भगवान्यू भोळो कोनी जको भूखो भैसां में जाय । हिंदी – कोई मूर्ख होगा जो प्रतिफल की इच्छा के बगैर कार्य करे।
अस्सी बरस पूरा हुया तो भी मन फेरां में रह्या ।
अहारे ब्योहारे लज्जा न कारे।
आ छाय तो ढोलियां जोगी ही| हिंदी – बेकार वस्तु के नुकसान का दुःख न होना।
आ नई काया सोने की, बार बार नहीं होणै की।
आ बलद मनै मार।
आ रै मेरा सम्पटपाट! मैं तनै चाटूं, मनै चाट।
आ ले पड़ोसण झूंपड़ी, नित उठ करती राड़।
आ सुन्दर मन्दर चलां तो बिन रह्यो न जाय। माता देवी आसकां, बै दिन पूंच्या आय॥
आँ तिलां मैँ तेल कोनी | हिंदी – क्षमता का अभाव।
आँख फड़कै दहणी, लात घमूका सहणी ।
आँख फड़कै बांई, के बीर मिलै के सांई ।
आँख कान को च्यार आंगल को फरक है।
आँख कान को च्यार आंगळ को फरक है ।
आँख गई संसार गयो, कान गयां हंकार गयो।
आँख फड़के दहणी, लात घमूका सहणी।
आँख फड़ूकै बांई, के बीर मिले के सांई।
आँख फुड़ाई मूंड मुन्डायो, घर को फेरयो द्वार । दोन्यू बोई रै बूबना, आदेश न जुहार ।।
आँख मीच्यां अंधेरो होय । हिंदी – ध्यान न देने पर अहसास का न होना।
आँखन, कान, मोती, करम, ढोल, बोल अर नार। अ तो फूट्या ना भला, ढाल, ताल, तलवार॥ हिंदी – ये सभी चीजेँ न ही टूटे-फूटे तो ही अच्छा है।
आँख्यां देखी परसराम, कदे न झूठी होय।
आँख्यां में गीड पड़ै, नांव मिरगानैणी।
आँख्यां सै आँधो, नांव नैणसुख।
आँण गाँव को बींद र गांव को छोरा।
आं तिला में तेल कोनी।
आंख गयी संसार गयो, कान गया हँकार गयो । हिंदी - आँख फूटने पर संसार दिखाई नहीँ देता वैसे ही बहरा होने पर अहंकार समाप्त हो जाता है।
आंख्याँ में गीड पड़ै, नांव मिरगानैणी ।
आंख्याँ देखी परसराम, कदे न झूठी होय । हिंदी – आँखोँ देखी घटना कभी झूँठी नहीँ होती।
आंख्याँ सै आन्धो, नांव नैनसुख ।
आंगल्यां सूं नूं परै कोनी हुवै।
आंट में आयोड़ो लो टूटै।
आंटै आई मैरे बिलाई
आंधा आगे ढोल बाजै, आ डमडमी क्यां की?
आंधा की गफ्फी, बहरा को बटको । राम छुटावै तो छूटै नहीं सिर ही पटको ।।
आंधा नै तो लाठी चाये।
आंधा पीसै कुत्ता खाय।
आंधा भागे रोवै, अपना दीदा खोवै।
आंधा मेँ काणोँ राव | हिंदी – मूर्खोँ मेँ कम गुणी व्यक्ति का भी आदर होता है।
आंधा सुसरा में क्यांकी लाज?
आंधी आई ही कोनी, सूंसाट पैली ही माचगो ।
आंधी भैंस बरू में चरै ।
आंधी मा पूत को माथो नोज देखै।
आंधै कै भांवै किंवाड़ ई पापड़।
आंधो बांटै सीरणी, घरकां नै ही दे।
आंधों के जाणै सावण की भार।
आंध्यां की माखी राम उडावै ।
आई रुत खेती, क्यूं करै पछैती।
आई ही छाय नै, घर की धिराणी बण बैठी।
आए लाडी आरो घालां, कह पूंछ ई आरै में तुड़ाई है।
आक को कीड़ो आक में, ढाक को कीड़ो ढाक में ।
आक में ईख, फोग में जीरो।
आक सींचै पण पीपल कोनी सींचै।
आकाश में थूकै जणा आपके ई मूं पर पड़ै।
आकास में बिजली चिमकै, गधेड़ो लात बावै।
आखर रामजी कै घर न्याव है।
आगली दाल नै ई पाणी कोनी।
आगलै सै पाछलो भलो।
आगे थारो पीछे म्हारो | हिंदी – जैसा आप करेँगे वैसा ही हम।
आगै आग न गैल्यां पाणी।
आगै आग न पीछै भींटकी
आगै मांडै पाछै दे, घट्या बध्या कागद सैं ले।
आगो थारो, पीछो म्हारो।
आज मरयो दिन दूसरो | हिंदी – जो हुआ सो हुआ।
आज मरां काल मरां, मर्या मर्या फिरां।
आज मरै जकै ने काल कद आवै।
आज मर्यो दिन दूसरो जो गया सो गया।
आज हमां और काल थमां | हिंदी – जो आज हम भुगत रहे हैँ, कल तुम भुगतोगे।
आज ही मोडियो मूंड मूंडायो आज ही ओला पड्या।
आटो कांटो घी घड़ो, खुल्लै केसां नार।
आठ पूरबिया नो चूल्हा।
आठ फिरंगी नो गोरा लड़ें जाट के दो छोरा ।
आडा आया माँ का जाया | हिंदी – कठिनाई मेँ सगे सम्बन्धी (भाई) सहायता करते हैँ।
आडू कै तो खाय मरै, कै उठा मरै।
आडू चाल्या हाट, न ताखड़ी न बाट | हिंदी – मूर्ख का कार्य अव्यवस्थित होना।
आडै दिन सै बास्योड़ो ही चोखो।
आत्मा सो परमात्मा।
आथणवचाई को मेह अर पावणूं आयो रहै।
आदम्यां की माया, बिरखां की छाया।
आदर खादर बाजे बाव , झूंपङ पङिया झोला खाय ।
आदरा बाजै बाये, झूंपड़ी झोला खाय।
आदरा भरै खाबड़ा, पुनबसु भरै तलाव।
आदै थाणी न्याय होय | हिंदी – बुरे/बेईमान को फल मिलता है।
आदै पाणी न्याव होय।
आधा में देई देवता, आधा में खेतरपाल।
आधाक सोवै, आधाक जागे, जद बातां का रंग दोराई लागै।
आधी छोड़ एक नै धावै, बाकी आदी मुंह से जावै।
आधे जेठ अमाव्साय रवि आथिमतो जोय।
आधै माह कांधे कामल बाह।
आधो घाल्यो ऊँखली, आधो घाल्यो छाज। सांगर साटै घण गई, मघरो मघरो राज।
आधो धरती में, आधो बारणै।
आधो बगड़ बुहारती, सारो बगड़ बुहार।
आप आपकी मूंछो कै सै ताव दे हैं।
आप आपकी रोट्यां नीचे सै आंच देवै।
आप आपके दाणै पाणी मे मसत है।
आप आपको जी सै नैं प्यारो।
आप कमाडा कामडा, दई न दीजे दोस | हिंदी – व्यक्ति के किये गए कर्मोँ के लिए ईश्वर को दोष नहीँ देना चाहिए।
आप की चाय गधा नै बाप बणावै।
आप गुरुजी कातरा मारै, चेला नै परमोद सिखावै | हिंदी – निठल्ले गुरुजी का शिष्योँ को उपदेश देना।
आप डुबन्तो पांडियो ले डूब्यो जजमान।
आप भलो तो जग भलो।
आप मरयां बिना सुरग कठै | हिंदी – काम स्वयं ही करना पड़ता है।
आप मर्यां जुग परलै।
आप में अक्कल घणी दीखै, दूसरै कनै घन घणूं दीखै।
आपका फाड्या की सै बुझावै।
आपकी एक फूटी को दुख कोनी, पड़ोसी को दोनों फूटी चाये।
आपकी खोल में सै मस्त।
आपकी गयां को दुख कोनी, जेठ की रह्यां को दुख है।
आपकी गली में कुत्ता नार।
आपकी छाय नै कोइ खाटी कोनी बतावै।
आपकी छोड़ पराई तक्कै, आवै ओसर कै धक्कै।
आपकी जांघ उघाड्यां आप ही लाजां मरै।
आपकी पराई और पराई आपकी।
आपकी मां ने डाकण कुण बतावै?
आपके लागै हीक में, दूसरो के लागे भीत में।
आपको कोढ़ सांमर सांमर ओढ़।
आपको ठको टको दूसरै को टको टकुलड़ी।
आपको बिगाड़यां बिना दूसरां को कोनी सुधरै।
आपको सो आपको और बिराणू लोग।
आपको हाथ जगन्नाथ!
आपनै उपजै कोनी, दूसरां की मानै कोनी।
आबरू लैर उधार दै।
आभ के अणी नहीं, वेश्या के धणी नहीं।
आभा की सी बीजली, होली की सी झल।
आभा राता मेह माता, आभा पीला मे सीला।
आम खाणा क पेड़ गिणना | हिंदी – मतलब से मतलब रखना।
आम नींबू बाणियो, कंठ भींच्यां जाणियो।
आम फलै नीचो नवै, अरंड आकासां जाय।
आया ही समाई पण गया की समाई कोनी।
आयी गूगा जांटी, बकरी दूधां नाटी।
आयो चैत निवायो फूडां मैल गंवायो।
आयो रात, गयो परभात।
आरिषड़ा सबब जोय कर समय बताऊँ तोय। भादूड़ो जुग रेलसी छठ अनुराधा होय।
आल के भाव को के बेरो।
आल पड़ै तो खेलुं मालूं, सूक पड़ै घर जाऊँ।
आलकसण ने रोट्याँ रो साग ।
आला बंचै न आप सै, सूका बंचै न कोई कै बाप सैं।
आवो मीयां खाणा खावो, बिसमिल्ला झट हाथ धुवावो। आवो मीयां छान उठावो, हम बूढ़ा कोई ज्वान बुलावो॥
आषाढ़ की पूनम, निरमल उगै चंद। कोई सिँध कोई मालवे जायां कट सी फंद॥ हिंदी – आषाढ़ की पूर्णिमा को चाँद के साथ बादल न होने पर अकाल की शंका व्यक्त की जाती है।
आसवाणी, भागवाणी।
आसाडां धुर अस्टमी, चन्द सेवरा छाय। च्यार मास चूतो रहै, जिउं भांडै रै राय॥
आसाडे धुर अष्टमी, चन्द उगन्तो जोय।
आसाडे सुद नवी नै बादल ना बीज। हलड़ फाडो ईंधन करो, बैठा चाबो बीज॥
आसाढ़ै सुद नोमी, घण बादल घण बीज। कोठा खेर खंखेर दो, राखो बलद ने बीज॥
आसी च्यानण छठ, ताकर मरसी पट। रूआयी चांदा छठ, कातरो मरसी पट॥
आसू जितरै मेह।
आसोजां का पड्या तावडा जोगी बणग्या जाट ।
आसोजी रा मेहड़ा, दोय बात बिनास। बोरटियां बोर नहीं, बिणयाँ नहीं कपास॥
आसोज्यां में पिछवा चाली, भर भर गाडा ल्याई।
इकलक के दोलक कै (इ क लग के अर दोलग कै)।
इजगर पूछै बिजगरा, कहा करत हो मिन्त। पड्या रहां हां धूल में, हरी करते है चिंत॥
इज्जत की लहजत ही और हुवै है।
इज्जत भरम की अर कमाई करम की।
इन्दर की मा भी तिसाई ही रही।
इन्नै पड़ै को कुवो, उन्नै पड़ै तो खाई।
इब ताणी तो बेटी बाप कै ही है | हिंदी – अभी कुछ नहीँ बिगड़ा।
इब ताणी तो बेटी बाप कै ही है।
इब पछतायां के बणै द चिड़िया चुग गई खेत।
इमरत तो रत्ती ही चोखो, झैर मण भी के काम को।
इसी खाट इस्या ही पाया, इस रांड इस्या ही जाया।
इसे परथावां का इसा ही गीत | हिंदी – जैसा विवाह वैसे ही गीत।
इसो ई तेरो खाणू दाणूं, इसो ई तेरो काम कराणुं।
इसो ई हरि गुण गायो, ईसो ई संख बजायो।
इस्समी खाण का इसा ही हीरा, इसी भैण का इसा ही बीरा।
ई की मा तो ई नै ही जायो | हिंदी – इसके बारे मेँ अनुमान नहीँ लगाया जा सकता।
ईसरो रो परमेसरो।
ईसानी बीसानी।
उघाड़ै वारणै धाड़ नहीं, उजाड़ गांव में राड़ नहीं।
उझल्या समदरा ना डटै।
उठै का मुरदा उठै बलेगा, अठे का अठे | हिंदी – एक स्थान की वस्तु दूसरे स्थान पर अनुपयोगी है।
उठो राणी, काढो बुहारी, आंगण आया, किरसन मुरारी।
उणीं गांव में पीर उणी में सासरो।
उतर भैंस मेरी बारी।
उतारदी लोई, के करैगो कोई।
उत्तम धरती मध्यम काया, उठो देव, जंगळ कूं आया।
उत्तर पातर, मैँ मियाँ तू चाकर | हिंदी – उऋण होने मेँ संतोष का द्योतक है।
उधार दियोड़ो आवै घर लेखै, नींतर हर लेखै ।
उन्नाळै खाटु भळी सियाळे अजमेर। नागाणौ नितको भळो सावणं बिकानेर॥
उललतै पालड़ै को कोई भी सीरी कोनी।
उल्टी गत गोपाल की, गई सिटल्लु मांय।
उल्टो चोर कोतवाल नै डांटै।
उल्टो दिन बूझ कर कोनी लागै।
उल्टो पाणी चीलां चढ़ै | हिंदी – अनहोनी की आशंका को व्यक्त करता है।

ऊँचे चढ़ चढ़ डोली डाकै, मरद नै थापै। राधो चेतो यूं कहै, थक्यां रहैगी आपै॥
ऊँचै गड का ऊंचा कांगरा।
ऊँचै चढ़ कर देखो, घर घर यो ही लेखो।
ऊँचो नाग चढ़ै तर ओड़े, दिस पिछमांण बादला दौड़े।
ऊँट कै मूं में जीरै सै के हुवै?
ऊँट को पाद धरती को न आकास को।
ऊँट को रोग रैबारी जाणै।
ऊँट खो ज्याय तो टोपली उतार लिये।
ऊँट चढ्या नै कुत्तो खाय।
ऊँटां नै सुहाल्यां सै के होय।
ऊं बात नै घोड़ा ई को नावड़ै ना।
ऊंखली में सिर दे जिको धमकां सैं के डरै।
ऊंट मिठाई इस्तरी, सोनो गहणो शाह। पांच चीज पिरथी सिरै, वाह बीकाणा वाह । हिंदी - काव्य पंक्तियां मरुधरा की ऐसी पांच विशिष्टताओं को उल्लेखित करती है जिनकी सराहना समूची दुनिया में हो रही है।
ऊंदरी को जायो बिल ही खोदै।
ऊंधै ही अर बिछायो लाद्यो।
ऊजड़ खेड़ा फिर बसै, निरधनियां धन होय। जबन गयो न बावड़ै मतना द्यो थे खोय॥
ऊत गये की चिट्ठी आई, बांचै जीनै राम दुहाई।
ऊत गयो दक्खन, उठे का ल्यायो लक्खन।
ऊत गांव में अरंड ही रूंख।
ऊत गांव में कुम्हारा ही महतो।
ऊतां कै के सींग होय है।
ऊदलती का किस दायजा?
ऊन'रै को जायेड़ो बिल ही खोदै ।
ऊपर तो लहर्यो पण नीचे के पहर्यो।
ऊपर राम चढ्यो देखै है।
ऊबर बागा, घर में नागा।
ऊबो मूतै सूत्यो खाय, जैंको दालद कदे न जाय।
ऊमस कर घृत माढ गमावे, झांड कीड़ी बहार लावे | नीर बिनां चिडियां रज न्हावै, तो मेह बरसे धर मांह न मावै।
ऊलै गैले चालै, खत्ता खाय।
एक आंख को के मीचै के खोलै।
एक आदर्यो हाथ लग ज्याय पछै तो करसो राजी।
एक ई बेल का तूमड़ा है।
एक करोट की रोटी बल उठै।
एक कांजी को टोपो दूध की भरी झाकरी नै बिगाड़ दे।
एक कांणू एक खोड़ो, राम मिलायो जोडो।
एक घर तो डाकण ही टालै है।
एक घर में बहुमता र जड़ां मूल सै जाय।
एक चणो दो दाल।
एक जणैं की हलाई डोर हालै।
एक जाड़ खाय, एक जाड़ तरसै।
एक टके की ठुकराणी, बैठी ठाली खाय । लाख टकां की जाटणी, पालो काटण जाय ।।
एक टको मेरी गांठी, मगद खांऊं क मांठी।
एक दिन पावणूं, दूजै दिन अनखावणो, तीजै दिन बाप को मुंघावणूं।
एक नन्नो सो दुख हड़ै।
एक पग उठावै अर दूसरै की आस कोनी।
एक पती बिन पाव रती।
एक पहिये सैं गाड़ी कौन्या चालै।
एक पीसा की पैदा नहीं, र घडी की फुरसत नहीं।
एक पैड वाली कोन्यार बाबा तिसाई।
एक बांदरी कै रूस्यां के अयोध्यां खाली हो ज्यासी।
एक बार योगी, दो बार भोगी, तीन बार रोगी।
एक भेड़ कुवै में पड़ै तो सै जा पड़ै।
एक म्यान में दो तलवार कोनी खटावै।
एक रती बिन पाव रती को।
एक लरड़ी तूगी जद के हुयो।
एक सैं दो भला।
एक सो एक अर दो सो दो।
एक हल हत्या, दो हल काज, तीन हल खेती, च्यार हल राज।
एक हाथ मैँ घोड़ो एक मैँ गधो है | हिंदी – भलाई-बुराई का साथ-साथ रहना।
एक हाथ लील में, एक हाथ कसूमा में।
एक हाथ सै ताली कोनी बाजै।
एकली लकड़ी ना जलैर नाय उजालो होय।
ऐ घर घोड़ी आपणा, बा छी बीकानेर। घास घणेरो घालस्यां, बांणू द्यूं ना सेर॥
ऐ विधनारा अंक, राई घटै न राजिया।
ऐँ बाई नै घर घणा | हिंदी – योग्य व्यक्ति हर जगह आदर पाता है।
ऐरण की चोरी करी, कर्यो सुई को दान। ऊपर चढ़ कर देखण लाग्यो, कद आवै बीमाण॥
ऐसा को तैसा मिल्या, बामण को नाई। बो दीना आसकां, बो आरसी दिखाई॥
ओ क्यां टो टाबर ? खाय बराबर।
ओ ही काल को पड़बो, ओ ही बाप को मरबो | हिंदी – कठिनाईयाँ एक साथ आती हैँ।
ओई पूत पटेलां में, ओई गोबर भारा में।
ओगड़ बेटो क्यांसू मोटो, लावो गिणै न टोटो।
ओछा की प्रीत कटारी को मरबो | हिंदी – ओछा अर्थात् निकृष्ट का साथ तथा कटारी से मरना दोनोँ ही एक समान हैँ।
ओछी गोडी ने सकड़, बहै उलाला बग्ग। बो ओठी बो करल हो, आयण होय अलग्ग॥
ओछी पूंजी घणै नै खाय।
ओछी पोटी में मोटी बात कोनी खटावै।
ओछै की प्रीत, बालू की सी भींत।
ओछै की मातैगगी, चाकी मांलो बास।
ओछो बोरो, गोदो को छोरो, बिना मुरै की सांड, नातै की रांड कदेई न्ह्याल कोनी करै।
ओडी भली न टोडी भली, खुल्लै केंसा नार।
ओस चाट्यां कसो पेट भरै।
ओसर चूकी डूमणी, गावै आलपताल।
ओसर चूक्या नै मोसर नहीं मिलै।
ओसर चूक्यां नै मौसर नहीँ मिलै | हिंदी – चूक होने पर अवसर नहीँ मिलता।
ओसां सै घड़ियो कोनी भरै।
औ और तो नार पड़्यो है पण काम में डबको।
और राड्या राड कराँ, ठाला बैठ्या के कराँ।
और सदा सूतो भलो ऊभो भणो असाढ़।
और सब सांग आ ज्मायं, बोरै वालो सांग कोन्या आवै।
और सब सांग आ ज्यायं, बोरै वालो सांग कोन्या आवै | हिंदी – निर्धन बोहरे (धनी) का स्वांग नहीँ भर सकता।