Rajasthan Backward Classes Amendment Bill, 2019

The Rajasthan Assembly has passed the Rajasthan Backward Classes Amendment Bill, 2019. The bill aims to address the demands of the Gujjars who are protesting for reservations.
The features of the Rajasthan Backward Classes Amendment Bill, 2019 are:

  • It provides 5% quota in jobs and educational institutions to Gurjars, Banjaras, Gadia Lohars, Raikas and Gadaria communities.
  • The communities, namely Gurjars, Banjaras, Gadia Lohars, Raikas and Gadaria are currently provided one per cent reservation under More Backward Classes (MBC).
  • The Bill seeks to grant them an additional four per cent quota.
  • The bill increases the ceiling of creamy layer from Rs 2.5 lakh to Rs 8 lakh.
  • With the 5% quota for Gurjars, Banjaras, Gadia Lohars, Raikas and Gadaria communities the backward classes’ reservation in the state has increased from present 21 per cent to 26 per cent.
  • The reservations in Rajasthan now crosses the 50 per cent cap on reservations set by the Supreme Court.
  • To avoid the possible legal tussle the Rajasthan Assembly passed a resolution and urged the Centre to incorporate it in the 9th schedule to ensure the reservation for these communities.
  • The statement on the objective and reasons for the bill notes that Parliament has amended the Constitution to exceed the limit of 50 per cent laid down by the Indra Sawhney case having regard to the compelling circumstances in which Economically Weaker Sections of the society are languishing.

राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित

जयपुर, 11 फरवरी। राज्य विधानसभा ने सोमवार को राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित कर दिया।  इससे पहले स्वायत्त शासन मंत्री श्री शान्ती कुमार धारीवाल ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए स्वायत्त शासन मंत्री ने कहा कि जन घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि चुनावों में शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता को खत्म किया जाएगा। इसी वादे को पूरा करते हुए यह संशोधन विधेयक लाया गया है। 
उन्होंने कहा कि ऎसे कई मामले सामने आए हैं, जहां झूठे सर्टिफिकेट के आधार पर चुनाव लड़ लिया गया। चुनावों में शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता के कारण शिक्षित और अशिक्षित दो वर्ग बन गए। अशिक्षित लोग खुद को हीन समझते हैं, जबकि कॉमन सेंस ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कई लोग अपने कॉमन सेंस के कारण बड़े प्रशासक साबित हुए।  उन्होंने कहा कि हरिदेव जोशी, भैंरो सिंह शेखावत, ज्ञानी जैल सिंह, राबड़ी देवी और उमा भारती जैसे महत्वपूर्ण लोग भी मैट्रिक पास न होने पर भी अच्छे प्रशासक साबित हुए। उन्होंने कहा कि अशिक्षित व्यक्ति भी अच्छे से अच्छा प्रशासक हो सकता है। इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने का संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।

राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित

राज्य विधानसभा ने सोमवार को राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री सचिन पायलट ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया।  विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए श्री पायलट ने कहा कि वर्तमान सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्व है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज अधिनियम में पूर्व में किए गए प्रावधान ऎसे थे, जिनसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किए गए सरपंच भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो गये थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के आधार पर समाज को दो श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता, इसलिए अधिनियम के प्रावधान संविधान की मूल भावना के विपरीत थे।  श्री पायलट ने बताया कि संवैधानिक संस्थाओं में शैक्षिक योग्यता की शुरूआत पहले ऊपर के स्तर से संसद और विधानसभा से होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समावेशी विकास के लिए सरकार की यह कोशिश है कि वंचित लोगो को भी समान रूप से अवसर मिल सके। 
श्री पायलट ने कहा कि यह संशोधन जनचेतना तथा लोकतंत्र में आस्था बढ़ाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से प्रत्येक जाति, श्रेणी, समाज तथा विशेष रूप से महिलाओं को लोकतान्ति्रक संस्थाओं में भाग लेने का अवसर मिल सकेगा।  उन्होंने कहा कि सरपंचों के पास आर्थिक निर्णय लेने के लिए प्रशासनिक मशीनरी उपलब्ध होती है इसलिए इस आधार पर शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता जरूरी नहीं है। इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।

गोडावण को COP-13 के लिए शुभंकर घोषित किया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन ने, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) / गोडावण को 2020 में गुजरात में आयोजित होने वाले प्रवासी प्रजाति (CMS) के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के 13 वें सम्मेलन के पार्टियों (COP) के लिए शुभंकर घोषित किया है. उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि पक्षी को मंत्रालय द्वारा 'गीबी' के रूप में नामित किया गया है.
CMS-COP 13 प्रवासी प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण और स्थायी उपयोग के लिए एक वैश्विक मंच है. इसमें 120 से अधिक भाग लेने वाले देश हैं. अब तक, 12 सीओपी (पार्टियों का सम्मेलन) आयोजित किया गया है. सरकार ने COP-13 के लिए एक वेबसाइट भी शुरू की है.CMS COP  ग्लोबल वाइल्डलाइफ सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है.